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वन पर्व
अध्याय ११५
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भृगुरु उवाच
एवमस्त्विति सा तेन पाण्डव प्रतिनन्दिता |  २८   क
जमदग्निं ततः पुत्रं सा जज्ञे काल आगते |  २८   ख
तेजसा वर्चसा चैव युक्तं भार्गवनन्दनम् ||  २८   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति