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वन पर्व
अध्याय २४७
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देवदूत उवाच
ऋभवो नाम तत्रान्ये देवानामपि देवताः |  १९   क
तेषां लोकाः परतरे तान्यजन्तीह देवताः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति