menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ३१
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततस्तव सुतो राजन्वर्म जग्राह काञ्चनम् |  ५४   क
विचित्रं च शिरस्त्राणं जाम्वूनदपरिष्कृतम् ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति