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भीष्म पर्व
अध्याय ११५
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सञ्जय़ उवाच
अथ पाण्डून्कुरूंश्चैव प्रणिपत्याग्रतः स्थितान् |  ३०   क
अभ्यभाषत धर्मात्मा भीष्मः शान्तनवस्तदा ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति