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भीष्म पर्व
अध्याय ११५
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सञ्जय़ उवाच
उपगम्य महात्मानं शय़ानं शय़ने शुभे |  ५८   क
तेऽभिवाद्य ततो भीष्मं कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम् ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति