menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
स केकय़ानां प्रवरांश्च पञ्च; पाञ्चालराजं च शरैः प्रमृद्य |  २४   क
युधिष्ठिरानीकमदीनय़ोधी; द्रोणोऽभ्ययात्कार्मुकवाणपाणिः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति