शान्ति पर्व  अध्याय ११६

युधिष्ठिर उवाच

पितामह महाप्राज्ञ संशय़ो मे महानय़म् |  १   क
स च्छेत्तव्यस्त्वय़ा राजन्भवान्कुलकरो हि नः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति