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भीष्म पर्व
अध्याय ५०
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सञ्जय़ उवाच
हताश्वे तु रथे तिष्ठन्भीमसेनः प्रतापवान् |  १०२   क
शक्तिं चिक्षेप तरसा गाङ्गेय़स्य रथं प्रति ||  १०२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति