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विराट पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
वित्रासय़ित्वा तत्सैन्यं द्रावय़ित्वा महारथान् |  १६   क
अर्जुनो जय़तां श्रेष्ठः पर्यवर्तत भारत ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति