अनुशासन पर्व  अध्याय ११६

भीष्म उवाच

आकाशान्मेदिनीं प्राप्तस्ततः स पृथिवीपतिः |  ५५   क
एतदेव पुनश्चोक्त्वा विवेश धरणीतलम् ||  ५५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति