अनुशासन पर्व  अध्याय १३०

महेश्वर उवाच

व्यपेततन्द्रो धर्मात्मा शक्या सत्पथमाश्रितः |  ३३   क
चारित्रपरमो वुद्धो व्रह्मभूय़ाय़ कल्पते ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति