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भीष्म पर्व
अध्याय १०५
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सञ्जय़ उवाच
पुत्रास्तु तव गाङ्गेय़ं समन्तात्पर्यवारय़न् |  ३७   क
महत्या सेनय़ा सार्धं ततो युद्धमवर्तत ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति