उद्योग पर्व  अध्याय ११६

नारद उवाच

उशीनरं प्रतिग्राह्य गालवः प्रय़यौ वनम् |  १७   क
रेमे स तां समासाद्य कृतपुण्य इव श्रिय़म् ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति