उद्योग पर्व  अध्याय ११६

नारद उवाच

उपस्थाय़ स तं विप्रो गालवः प्रतिगृह्य च |  २१   क
कन्यां प्रय़ातस्तां राजन्दृष्टवान्विनतात्मजम् ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति