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भीष्म पर्व
अध्याय ११६
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सञ्जय़ उवाच
ततः प्रदक्षिणं कृत्वा रथेन रथिनां वरः |  २१   क
शय़ानं भरतश्रेष्ठं सर्वशस्त्रभृतां वरम् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति