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भीष्म पर्व
अध्याय ११६
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सञ्जय़ उवाच
न वै श्रुतं धार्तराष्ट्रेण वाक्यं; सम्वोध्यमानं विदुरेण चैव |  ३४   क
द्रोणेन रामेण जनार्दनेन; मुहुर्मुहुः सञ्जय़ेनापि चोक्तम् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति