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द्रोण पर्व
अध्याय ११६
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सञ्जय़ उवाच
ततोऽप्रहृष्टः कौन्तेय़ः केशवं वाक्यमव्रवीत् |  २६   क
न मे प्रिय़ं महावाहो यन्मामभ्येति सात्यकिः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति