द्रोण पर्व  अध्याय ११६

सञ्जय़ उवाच

एतेन हि महावाहो रक्षितव्यः स पार्थिवः |  २८   क
तमेष कथमुत्सृज्य मम कृष्ण पदानुगः ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति