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द्रोण पर्व
अध्याय ११६
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सञ्जय़ उवाच
सोऽय़ं गुरुतरो भारः सैन्धवान्मे समाहितः |  ३०   क
ज्ञातव्यश्च हि मे राजा रक्षितव्यश्च सात्यकिः ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति