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आदि पर्व
अध्याय ११७
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वैशम्पाय़न उवाच
पाण्डोरवभृथं कृत्वा देवकल्पा महर्षय़ः |  १   क
ततो मन्त्रमकुर्वन्त ते समेत्य तपस्विनः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति