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आदि पर्व
अध्याय ११७
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वैशम्पाय़न उवाच
ते परस्परमामन्त्र्य सर्वभूतहिते रताः |  ४   क
पाण्डोः पुत्रान्पुरस्कृत्य नगरं नागसाह्वय़म् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति