शान्ति पर्व  अध्याय ३२५

भीष्म उवाच

प्राप्य श्वेतं महाद्वीपं नारदो भगवानृषिः |  १   क
ददर्श तानेव नराञ्श्वेतांश्चन्द्रप्रभाञ्शुभान् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति