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शान्ति पर्व
अध्याय ११७
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भीष्म उवाच
वने महति कस्मिंश्चिदमनुष्यनिषेविते |  ३   क
ऋषिर्मूलफलाहारो निय़तो निय़तेन्द्रिय़ः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति