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शान्ति पर्व
अध्याय ११७
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भीष्म उवाच
तस्य सन्दृश्य सद्भावमुपविष्टस्य धीमतः |  ५   क
सर्वसत्त्वाः समीपस्था भवन्ति वनचारिणः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति