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अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
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नारद उवाच
सम्भवन्ति ततः शुक्रात्प्राणिनः पृथिवीपते |  ४०   क
अग्नीषोमौ हि तच्छुक्रं प्रजनः पुष्यतश्च ह ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति