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अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
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भीष्म उवाच
न हि तत्परमं किञ्चिदिह लोके परत्र च |  २०   क
यत्सर्वेष्विह लोकेषु दय़ा कौरवनन्दन ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति