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अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
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भीष्म उवाच
गर्भवासेषु पच्यन्ते क्षाराम्लकटुकै रसैः |  २८   क
मूत्रश्लेष्मपुरीषाणां स्पर्शैश्च भृशदारुणैः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति