अनुशासन पर्व  अध्याय ११७

भीष्म उवाच

अहिंसा परमो यज्ञस्तथाहिंसा परं वलम् |  ३८   क
अहिंसा परमं मित्रमहिंसा परमं सुखम् |  ३८   ख
अहिंसा परमं सत्यमहिंसा परमं श्रुतम् ||  ३८   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति