उद्योग पर्व  अध्याय ११७

नारद उवाच

गालवोऽपि सुपर्णेन सह निर्यात्य दक्षिणाम् |  २०   क
मनसाभिप्रतीतेन कन्यामिदमुवाच ह ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति