शान्ति पर्व  अध्याय ३१०

भीष्म उवाच

मार्कण्डेय़ो हि भगवानेतदाख्यातवान्मम |  २४   क
स देवचरितानीह कथय़ामास मे सदा ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति