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भीष्म पर्व
अध्याय १०७
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सञ्जय़ उवाच
अर्जुनो वार्यमाणस्तु वहुशस्तनय़ेन ते |  ५३   क
विमुखीकृत्य पुत्रं ते तव सेनां ममर्द ह ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति