menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
स सिंह इव मातङ्गं विकर्षन्भूरिदक्षिणः |  ५२   क
व्यरोचत कुरुश्रेष्ठः सात्वतप्रवरं युधि ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति