शान्ति पर्व  अध्याय ६९

भीष्म उवाच

काष्ठानि चाभिहार्याणि तथा कूपांश्च खानय़ेत् |  ४४   क
संशोधय़ेत्तथा कूपान्कृतान्पूर्वं पय़ोर्थिभिः ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति