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शान्ति पर्व
अध्याय ११८
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भीष्म उवाच
सर्वसङ्ग्रहणे युक्तो नृपो भवति यः सदा |  २७   क
उत्थानशीलो मित्राढ्यः स राजा राजसत्तमः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति