अनुशासन पर्व  अध्याय ११८

कीट उवाच

भृत्यातिथिजनश्चापि गृहे पर्युषितो मय़ा |  २०   क
मात्सर्यात्स्वादुकामेन नृशंसेन वुभूषता ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति