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वन पर्व
अध्याय ११८
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वैशम्पाय़न उवाच
सरस्वत्याः सिद्धगणस्य चैव; पूष्णश्च ये चाप्यमरास्तथान्ये |  १३   क
पुण्यानि चाप्याय़तनानि तेषां; ददर्श राजा सुमनोहराणि ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति