उद्योग पर्व  अध्याय ११८

नारद उवाच

गृहीतमाल्यदामां तां रथमारोप्य माधवीम् |  २   क
पूरुर्यदुश्च भगिनीमाश्रमे पर्यधावताम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति