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द्रोण पर्व
अध्याय ११८
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अर्जुन उवाच
या प्रीतिर्धर्मराजे मे भीमे च वदतां वरे |  २९   क
नकुले सहदेवे च सा मे त्वय़ि शलाग्रज ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति