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द्रोण पर्व
अध्याय ११८
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सञ्जय़ उवाच
स मोघं कृतमात्मानं दृष्ट्वा पार्थेन कौरवः |  ३   क
उत्सृज्य सात्यकिं क्रोधाद्गर्हय़ामास पाण्डवम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति