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द्रोण पर्व
अध्याय ११८
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अर्जुन उवाच
मय़ा तु समनुज्ञातः कृष्णेन च महात्मना |  ३०   क
गच्छ पुण्यकृताँल्लोकाञ्शिविरौशीनरो यथा ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति