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द्रोण पर्व
अध्याय ११८
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सञ्जय़ उवाच
कर्णेन वृषसेनेन सैन्धवेन तथैव च |  ३५   क
विक्रोशतां च सैन्यानामवधीत्तं यतव्रतम् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति