आदि पर्व  अध्याय १

सूत उवाच

तमसा त्वभ्यवस्तीर्णो मोह आविशतीव माम् |  १५९   क
सञ्ज्ञां नोपलभे सूत मनो विह्वलतीव मे ||  १५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति