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शान्ति पर्व
अध्याय २७२
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भीष्म उवाच
अथ वृत्रस्य कौरव्य दृष्ट्वा शक्रमुपस्थितम् |  १२   क
न सम्भ्रमो न भीः काचिदास्था वा समजाय़त ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति