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वन पर्व
अध्याय ११९
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वैशम्पाय़न उवाच
नासौ धिय़ा सम्प्रतिपश्यति स्म; किं नाम कृत्वाहमचक्षुरेवम् |  ११   क
जातः पृथिव्यामिति पार्थिवेषु; प्रव्राज्य कौन्तेय़मथापि राज्यात् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति