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वन पर्व
अध्याय ११९
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वैशम्पाय़न उवाच
नूनं समृद्धान्पितृलोकभूमौ; चामीकराभान्क्षितिजान्प्रफुल्लान् |  १२   क
विचित्रवीर्यस्य सुतः सपुत्रः; कृत्वा नृशंसं वत पश्यति स्म ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति