menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ११९
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
स क्षुत्पिपासाध्वकृशस्तरस्वी; समेत्य नानाय़ुधवाणपाणिः |  १५   क
वने स्मरन्वासमिमं सुघोरं; शेषं न कुर्यादिति निश्चितं मे ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति