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शान्ति पर्व
अध्याय ८२
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वासुदेव उवाच
दास्यमैश्वर्यवादेन ज्ञातीनां वै करोम्यहम् |  ५   क
अर्धभोक्तास्मि भोगानां वाग्दुरुक्तानि च क्षमे ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति