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द्रोण पर्व
अध्याय ११९
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सञ्जय़ उवाच
पुत्रमिच्छामि भगवन्यो निहन्याच्छिनेः सुतम् |  १७   क
मध्ये राजसहस्राणां पदा हन्याच्च संय़ुगे ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति