द्रोण पर्व  अध्याय ११९

धृतराष्ट्र उवाच

स कथं कौरवेय़ेण समरेष्वनिवारितः |  २   क
निगृह्य भूरिश्रवसा वलाद्भुवि निपातितः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति