सौप्तिक पर्व  अध्याय १२

वैशम्पाय़न उवाच

स कदाचित्समुद्रान्ते वसन्द्रारवतीमनु |  १२   क
एक एकं समागम्य मामुवाच हसन्निव ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति